क्रिकेट नियम: 5 बदलाव 2026 में
क्रिकेट के नियम हिंदी में समझने का सीधा आधार यह है कि दो टीमें बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण के जरिए रन और विकेट के अंतर से मुकाबला करती हैं। अंतरराष्ट्रीय नियमों का मूल ढांचा मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब, यानी एमसीसी, तैयार करता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड प्रतियोगिता के अनुसार अतिरिक्त शर्तें लागू कर सकते हैं। एक ओवर में छह वैध गेंद होती हैं, टी20 मुकाबले में प्रत्येक पारी सामान्यतः 20 ओवर की होती है और एक टीम में 11 खिलाड़ी रहते हैं। नो-बॉल पर बल्लेबाजी टीम को कम-से-कम एक अतिरिक्त रन मिलता है तथा सीमित ओवरों में अगली गेंद अक्सर फ्री हिट होती है। टॉस के बाद कप्तान पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनता है। मैदान, प्रतियोगिता और मौसम से जुड़े स्थानीय नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए मैच शुरू होने से पहले खेल की शर्तें अवश्य पढ़ें।

क्रिकेट का असली मजा तब आता है जब नियम केवल किताब में नहीं, हर गेंद के साथ दिखाई देने लगते हैं। बल्लेबाज रन लेने के लिए क्रीज बदलते हैं, गेंदबाज विकेट पर निशाना साधता है और अंपायर उस क्षण का अंतिम फैसला देता है। क्रिकेट गाइड पर मैच समीक्षा, खिलाड़ी आंकड़े, आईपीएल कवरेज तथा बल्लेबाजी और गेंदबाजी रणनीति को इसी नियम-आधारित नजर से समझाया जाता है। याद रखिए, “अंपायर का निर्णय अंतिम होता है” कहना आसान है; अपील करते समय शांत रहना कठिन, और क्रिकेट में यही छोटी मुश्किलें बड़े नाटक बनाती हैं। शुरुआती पाठकों के लिए क्रिकेट मार्गदर्शिका पढ़ने से पिच की मूल शब्दावली भी साफ होगी।
और नियमों को उदाहरणों के साथ समझना हो तो शुरुआत यहाँ से करें।
यदि आप पहली बार देख रहे हैं: मैदान और पारी समझें
पहली बार क्रिकेट देखने वाले व्यक्ति को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि खेल पिच के दो सिरों, दो क्रीज और विकेटों के आसपास चलता है। पिच की लंबाई 22 गज होती है, बल्लेबाज का सुरक्षित क्षेत्र क्रीज से निर्धारित होता है और गेंदबाज को वैध गेंद के लिए निर्धारित छोर से गेंद डालनी होती है। एक पारी तब समाप्त हो सकती है जब सभी विकेट गिर जाएँ, निर्धारित ओवर पूरे हो जाएँ या लक्ष्य हासिल हो जाए। टेस्ट क्रिकेट में पारी की संख्या और समय अलग होते हैं, जबकि एकदिवसीय क्रिकेट में सामान्यतः 50 ओवर और टी20 क्रिकेट में 20 ओवर होते हैं। यह अंतर याद न रखने पर स्कोरबोर्ड आपको ऐसे घूरेगा जैसे आपने उसकी चाय पी ली हो।
मैच में 11 खिलाड़ी होते हैं, लेकिन बल्लेबाजी क्रम और क्षेत्ररक्षण की जिम्मेदारियाँ अलग-अलग हो सकती हैं। दो बल्लेबाज एक समय क्रीज पर रहते हैं; स्ट्राइक पर मौजूद बल्लेबाज गेंद का सामना करता है और दूसरा छोर संभालता है। छह वैध गेंदों के बाद ओवर बदलता है और गेंदबाज का छोर भी बदल जाता है, हालांकि क्षेत्ररक्षक कप्तान की योजना के अनुसार स्थान बदल सकते हैं। टॉस, पारी, ओवर और लक्ष्य को क्रम में समझना जरूरी है, क्योंकि स्कोर 120 रन होना अपने-आप में अर्थहीन है जब तक यह पता न हो कि कितने ओवर में और किस लक्ष्य के सामने बने।
- रन: बल्लेबाजों के क्रीज बदलने या गेंद सीमा पार करने से मिलते हैं।
- विकेट: बल्लेबाज के आउट होने या कुछ मामलों में पारी समाप्त होने का संकेत है।
- ओवर: छह वैध गेंदों का समूह है; वाइड और नो-बॉल वैध गेंदों में नहीं गिनी जातीं।
- लक्ष्य: पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम के स्कोर से एक रन अधिक होता है।
क्रिकेट स्कोरबोर्ड पढ़ने का सरल तरीका से रन, विकेट, औसत और आवश्यक रनरेट को समझना आसान होगा।
यदि आप बल्लेबाजी कर रहे हैं: रन और आउट के नियम अपनाएँ
बल्लेबाज का उद्देश्य केवल गेंद को दूर मारना नहीं, बल्कि वैध रन बनाते हुए विकेट बचाना है। बल्लेबाज गेंद लगने के बाद दोनों छोर बदल लें तो एक रन पूरा होता है, और दौड़ के दौरान बल्ले या शरीर का कोई हिस्सा क्रीज के पीछे जमीन से जुड़ा होना सुरक्षित माना जाता है। चौका तब मिलता है जब गेंद जमीन को छूते हुए सीमा तक पहुँचती है, जबकि छक्का तब मिलता है जब गेंद बिना जमीन छुए सीमा के बाहर जाती है। गेंद बल्ले से न लगकर शरीर से टकराए और बल्लेबाज दौड़े, तो परिस्थिति के अनुसार लेग-बाई मिल सकती है; बल्ले या शरीर से अलग होकर निकली गेंद पर बाई दी जा सकती है।
आउट होने के तरीके समझना अधिक उपयोगी है, क्योंकि हर अपील विकेट नहीं बनती। बोल्ड में गेंद विकेटों को गिराती है, कैच में बल्ले से लगी गेंद जमीन छूने से पहले क्षेत्ररक्षक पकड़ता है, और एलबीडब्ल्यू में गेंद के पैड से लगने पर अंपायर कुछ निर्धारित शर्तों के आधार पर आउट दे सकता है। रन आउट तब होता है जब बल्लेबाज क्रीज से बाहर हो और विकेट टूट जाए; स्टंपिंग में विकेटकीपर गेंद पकड़कर क्रीज से बाहर बल्लेबाज का विकेट गिराता है। हिट विकेट, ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड और टाइम्ड आउट जैसे दुर्लभ नियम भी आधिकारिक नियम-पुस्तिका में मौजूद हैं। मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब के नियम में इन स्थितियों का विस्तृत आधिकारिक विवरण मिलता है।
एक महत्वपूर्ण किनारा यह है कि नो-बॉल पर बल्लेबाज आम तौर पर कैच, बोल्ड या एलबीडब्ल्यू से आउट नहीं होता, लेकिन रन आउट, स्टंपिंग के कुछ रूप और हिट-द-विकेट जैसी स्थितियाँ नियमों के अधीन बनी रह सकती हैं। फ्री हिट नो-बॉल के बाद आती है, पर वह हर प्रकार के आउट से पूर्ण सुरक्षा नहीं देती। इसलिए “फ्री हिट मतलब बल्लेबाज अजेय” कहना वैसा ही है जैसे बारिश में छाता लेकर तैरने निकलना। बल्लेबाज को गेंद की ऊँचाई, पैर की स्थिति और फील्डर की जगह तीनों पर नजर रखनी चाहिए।
इन सूक्ष्म स्थितियों पर पकड़ बनाने के लिए यह संदर्भ उपयोगी है।

यदि आप गेंदबाजी या अंपायरिंग समझना चाहते हैं: वैध गेंद पहचानें
गेंदबाजी में सबसे पहले वैध गेंद की पहचान करनी चाहिए, क्योंकि वाइड और नो-बॉल स्कोर तथा ओवर दोनों को प्रभावित करते हैं। वाइड तब दी जाती है जब गेंद बल्लेबाज की सामान्य पहुँच से इतनी बाहर हो कि वह उचित शॉट न खेल सके, हालांकि बल्लेबाज की हरकत और गेंद की दिशा के आधार पर अंपायर निर्णय करता है। नो-बॉल पैर क्रीज से आगे निकलने, कमर से ऊपर की खतरनाक फुल-टॉस, सीमित ओवरों में कुछ ऊँची बाउंसर स्थितियों या अन्य तकनीकी उल्लंघनों के कारण हो सकती है। नियम प्रतियोगिता के अनुसार थोड़ा बदल सकते हैं, इसलिए मैच की खेल-शर्तें देखना जरूरी है।
नो-बॉल और वाइड दोनों पर बल्लेबाजी टीम को अतिरिक्त रन मिलता है, लेकिन अंतर यह है कि नो-बॉल के बाद सीमित ओवरों में फ्री हिट दी जा सकती है। यदि नो-बॉल पर बल्लेबाज गेंद को सीमा तक भेजता है, तो बल्ले से बने चार रन के साथ नो-बॉल का अतिरिक्त रन भी स्कोर में जुड़ता है। वाइड गेंद सीमा पार कर जाए तो वाइड के अतिरिक्त रन और सीमा नियम के अनुसार कुल रन मिल सकते हैं। ओवर में छह वैध गेंद पूरी होने तक गेंदें जारी रहती हैं; इसलिए पाँचवीं गेंद वाइड होने पर अगली गेंद अभी उसी ओवर की छठी वैध गेंद नहीं बनती।
अंपायर का काम केवल उंगली उठाना नहीं है। वह गेंद की वैधता, कैच की जमीन से दूरी, क्रीज की स्थिति और बल्लेबाज के इरादे जैसे तत्व देखता है। अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में निर्णय समीक्षा प्रणाली उपलब्ध हो सकती है, पर हर प्रतियोगिता में इसकी संख्या, समय-सीमा और तकनीकी सुविधा समान नहीं होती। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियम-संसाधन बताते हैं कि प्रतियोगिता-विशेष शर्तें आधिकारिक नियमों के साथ पढ़ी जानी चाहिए। मैदान में लगी स्क्रीन कोई जादुई भविष्यवक्ता नहीं; तकनीक भी उपलब्ध कोण और प्रमाण पर निर्भर करती है।
- वाइड: वैध गेंद नहीं गिनी जाती और अतिरिक्त रन मिलता है।
- नो-बॉल: वैध गेंद नहीं गिनी जाती; सीमित ओवरों में सामान्यतः अगली गेंद फ्री हिट होती है।
- बाई: गेंद बल्ले से न लगे और बल्लेबाज दौड़ें।
- लेग-बाई: गेंद शरीर से लगे और नियमों के अनुसार रन बने।
- ओवरथ्रो: फील्डिंग के बाद अतिरिक्त दौड़ या सीमा से बने रन स्कोर में जुड़ सकते हैं।
सामान्य गलतियों से कैसे बचें?
क्रिकेट नियमों में सबसे आम गलती यह मानना है कि हर सीमा पर चार रन और हवा में गई हर गेंद पर कैच होता है। सही निर्णय के लिए यह देखना पड़ता है कि गेंद ने जमीन छुई या नहीं, फील्डर का नियंत्रण बना रहा या नहीं और सीमा-रेखा पर फील्डर का पैर तो नहीं लगा। दूसरी गलती है ओवर की गेंदें गिनते समय वाइड और नो-बॉल को शामिल कर देना; इससे स्कोर और रणनीति दोनों गलत समझे जाते हैं। तीसरी भूल लेग-बाई को बल्लेबाज के व्यक्तिगत स्कोर में जोड़ना है, जबकि यह टीम के अतिरिक्त रन में जाती है।
मैच देखते समय विवाद कम करने के लिए एक छोटा नियम-क्रम अपनाएँ। पहले गेंद वैध थी या नहीं, यह देखें; फिर बल्लेबाज और गेंद का संपर्क, उसके बाद क्रीज और कैच की स्थिति जाँचें। यदि समीक्षा उपलब्ध हो, तो निर्णय के तकनीकी आधार को समझें, केवल भीड़ की आवाज पर निर्भर न रहें। एमसीसी की आधिकारिक भाषा खेल की निष्पक्षता और “खेल भावना” पर जोर देती है; इसका अर्थ यह नहीं कि हर खिलाड़ी संत की तरह मुस्कुराएगा, बल्कि यह कि नियम का लाभ जानबूझकर छल से नहीं उठाया जाना चाहिए।
मैच से पहले इन पाँच बातों की जाँच करें:
- मुकाबला टी20, एकदिवसीय या टेस्ट प्रारूप का है।
- डीआरएस उपलब्ध है या नहीं और कितनी समीक्षा मिलती हैं।
- बाउंड्री, छत, जाल और स्थानीय मैदान नियम क्या हैं।
- बारिश की स्थिति में संशोधित लक्ष्य कौन-सी पद्धति से निकलेगा।
- धीमी ओवर गति, पावरप्ले और क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध कैसे लागू होंगे।

यह जाँच विशेष रूप से स्थानीय टूर्नामेंट में जरूरी है, जहाँ आयोजक आठ या दस ओवर की पारी, सीमित खिलाड़ी और अलग बाउंड्री नियम रख सकते हैं। किसी आयोजन-पत्र में “आठ खिलाड़ी खेलेंगे और एक अतिरिक्त खिलाड़ी रहेगा” जैसी शर्त हो सकती है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सामान्य नियम नहीं है। इसी तरह पहली या अंतिम गेंद के रन दोगुने करने, जाल से टकराने पर निश्चित रन देने या “मैजिक ओवर” जोड़ने जैसी बातें केवल स्थानीय प्रतियोगिता के विशेष नियम हो सकती हैं। यही वह जानकारी है जिसे सामान्य लेख अक्सर छोड़ देते हैं: नियम का नाम क्रिकेट हो सकता है, पर खेल-शर्तें अलग हों तो परिणाम भी अलग होगा।
अधिक उन्नत रणनीति के लिए अगला संदर्भ देखें।
30 दिनों में नियमों की पकड़ कैसे जाँचें?
तीस दिनों में क्रिकेट नियमों की मजबूत बुनियाद बनाने के लिए रोज 15 से 20 मिनट पर्याप्त हैं, बशर्ते आप केवल वीडियो देखकर सिर न हिलाते रहें। पहले सप्ताह में पिच, क्रीज, विकेट, ओवर, रन और आउट के तरीके पढ़ें। दूसरे सप्ताह में वाइड, नो-बॉल, बाई, लेग-बाई, फ्री हिट और सीमा-नियमों पर ध्यान दें। तीसरे सप्ताह में स्कोरकार्ड देखकर आवश्यक रनरेट, विकेट शेष और ओवर शेष की गणना करें। चौथे सप्ताह में किसी टी20 या एकदिवसीय मैच के पाँच विवादित क्षण रोककर अपना निर्णय लिखें, फिर अंपायर और आधिकारिक नियम से तुलना करें।
इस अभ्यास में नियम याद करने से अधिक महत्वपूर्ण है घटना का क्रम समझना। उदाहरण के लिए, यदि नो-बॉल पर गेंद बल्ले से लगकर सीमा पार जाती है, तो पहले नो-बॉल रन जोड़ें, फिर सीमा से बने रन; यदि गेंद वैध नहीं थी, तो ओवर की गिनती भी अलग रहेगी। इसी तरह रन आउट में केवल विकेट गिरना पर्याप्त नहीं, बल्लेबाज का सुरक्षित क्षेत्र से बाहर होना भी आवश्यक है। [क्रिकेट रणनीति और खिलाड़ी आंकड़े](आंतरिक लिंक: उन्नत बल्लेबाजी तथा गेंदबाजी विश्लेषण) के साथ नियम जोड़कर पढ़ने पर पता चलता है कि पावरप्ले में क्षेत्ररक्षण प्रतिबंध क्यों जोखिम बढ़ाते हैं और स्पिन गेंदबाज की गति क्यों निर्णायक हो सकती है।
30वें दिन यह स्वयं-जाँच सूची पूरी करें:
- क्या आप छह वैध गेंद और पूरे ओवर का अंतर बता सकते हैं?
- क्या आप वाइड, नो-बॉल, बाई और लेग-बाई अलग कर सकते हैं?
- क्या आप कम-से-कम पाँच आउट के तरीके समझा सकते हैं?
- क्या आप लक्ष्य, रनरेट और डकवर्थ-लुईस-स्टर्न पद्धति का मूल अर्थ जानते हैं?
- क्या आप स्थानीय प्रतियोगिता की अतिरिक्त शर्तों को आधिकारिक नियम से अलग पहचानते हैं?
निष्कर्ष सीधा है: क्रिकेट के नियम हिंदी में सीखने का सबसे अच्छा तरीका उन्हें मैच की वास्तविक घटनाओं से जोड़ना है। एमसीसी मूल कानून देता है, आईसीसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए ढांचा तय करता है और बीसीसीआई जैसे बोर्ड स्थानीय टूर्नामेंट की शर्तें जोड़ सकते हैं। आईसीसी की खेल भावना संबंधी जानकारी और आधिकारिक खेल-शर्तें पढ़कर आप गलत धारणाओं से बच सकते हैं। अब अगला मैच देखते समय केवल चौके पर मत चिल्लाइए; पहले देखिए गेंद वैध थी या नहीं—क्रिकेट में छोटी-सी अतिरिक्त गेंद भी पूरी कहानी बदल देती है।
नियम, रणनीति और मैच विश्लेषण लगातार पढ़ते रहने के लिए क्रिकेट गाइड से जुड़े रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट के मूल नियम क्या हैं?
उत्तर: क्रिकेट में दो टीमें रन बनाने और विपक्षी टीम के विकेट लेने का मुकाबला करती हैं। एक टीम बल्लेबाजी करती है, जबकि दूसरी गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण करती है। एक ओवर में छह वैध गेंद होती हैं और प्रारूप के अनुसार ओवरों की संख्या बदलती है। टी20 में सामान्यतः 20 ओवर, एकदिवसीय में 50 ओवर और टेस्ट में समय तथा पारियों का अलग ढांचा होता है।
प्रश्न: एक ओवर में कितनी गेंद होती हैं?
उत्तर: एक ओवर में छह वैध गेंद होती हैं। वाइड और नो-बॉल वैध गेंद नहीं गिनी जातीं, इसलिए उनके बाद अतिरिक्त गेंद डाली जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी ओवर में दो वाइड हों, तो गेंदबाज को छह वैध गेंद पूरी करने के लिए आठ कुल गेंदें डालनी पड़ सकती हैं। यही कारण है कि स्कोरबोर्ड पर गेंदों की संख्या हमेशा फेंकी गई कुल गेंदों के बराबर नहीं होती।
प्रश्न: चौका और छक्का में क्या अंतर है?
उत्तर: चौका जमीन को छूते हुए सीमा पार करने पर मिलता है, जबकि छक्का बिना जमीन छुए सीमा के बाहर जाने पर मिलता है। सामान्य स्थिति में चौके के चार और छक्के के छह रन होते हैं। यदि गेंद सीमा से पहले फील्डर के संपर्क में आए या ओवरथ्रो से सीमा पार करे, तो रन की गणना अलग परिस्थिति के अनुसार हो सकती है। सीमा-रेखा पर फील्डर का पैर भी निर्णय बदल सकता है।
प्रश्न: नो-बॉल के बाद फ्री हिट कैसे मिलती है?
उत्तर: सीमित ओवरों के क्रिकेट में सामान्य नो-बॉल के बाद अगली गेंद फ्री हिट होती है। फ्री हिट पर बल्लेबाज बोल्ड, सामान्य कैच या एलबीडब्ल्यू से आउट नहीं होता, लेकिन रन आउट, स्टंपिंग की विशेष स्थिति और कुछ अन्य नियम लागू रह सकते हैं। प्रतियोगिता की खेल-शर्तें देखना आवश्यक है, क्योंकि हर स्थानीय प्रारूप में फ्री हिट का प्रावधान समान नहीं होता।
प्रश्न: डीआरएस काम न करे तो क्या होता है?
उत्तर: डीआरएस उपलब्ध न होने या तकनीकी रूप से विफल होने पर मैदान के अंपायर का निर्णय लागू रहता है। समीक्षा प्रणाली कैमरा, गेंद-ट्रैकिंग और ध्वनि-साक्ष्य जैसी तकनीक पर निर्भर करती है, इसलिए उसका उपयोग प्रतियोगिता की सुविधाओं और नियमों पर आधारित होता है। स्थानीय मैचों में डीआरएस पूरी तरह अनुपस्थित हो सकता है। ऐसी स्थिति में कप्तान या खिलाड़ी केवल निर्धारित अपील प्रक्रिया का पालन कर सकते हैं।
प्रश्न: क्रिकेट खेलने के लिए कितने खिलाड़ी चाहिए?
उत्तर: आधिकारिक क्रिकेट टीम में सामान्यतः 11 खिलाड़ी होते हैं और एक समय दो बल्लेबाज मैदान पर रहते हैं। प्रतियोगिता में अतिरिक्त खिलाड़ी या स्थानापन्न खिलाड़ी हो सकते हैं, लेकिन उनकी भूमिका खेल-शर्तों से नियंत्रित होती है। स्थानीय आठ-ओवर या दस-ओवर मैचों में आयोजक अलग संख्या तय कर सकते हैं। इसलिए मैच शुरू होने से पहले टीम आकार, स्थानापन्न और गेंदबाजी सीमा की घोषणा पढ़ना जरूरी है।