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7 नो-बॉल नियम बनाम मिथक: सही फैसला

क्रिकेट में नो-बॉल केवल एक अतिरिक्त रन नहीं, बल्कि गेंदबाज़ की तकनीकी गलती पर बल्लेबाज़ को मिलने वाला महत्वपूर्ण लाभ है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के नियमों के अनुसार, फ्रंट-फुट क्रीज़ से बाहर हो...

19 अक्टूबर 2026 5 min read
7 नो-बॉल नियम बनाम मिथक: सही फैसला
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7 नो-बॉल नियम बनाम मिथक: सही फैसला

क्रिकेट में नो-बॉल केवल एक अतिरिक्त रन नहीं, बल्कि गेंदबाज़ की तकनीकी गलती पर बल्लेबाज़ को मिलने वाला महत्वपूर्ण लाभ है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के नियमों के अनुसार, फ्रंट-फुट क्रीज़ से बाहर होना, कमर से ऊपर खतरनाक फुल टॉस और गलत गेंदबाज़ी क्षेत्ररक्षण नो-बॉल बना सकते हैं। आधुनिक एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट में नो-बॉल पर सामान्यतः 1 अतिरिक्त रन मिलता है और अगली गेंद फ्री-हिट होती है। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में फ्री-हिट का नियम लागू नहीं होता। नो-बॉल पर बल्लेबाज़ रन-आउट, हिट-द-बॉल-ट्वाइस और कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर आउट नहीं हो सकता। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी), एमसीसी और मैच के प्रारूप के नियम अंतिम निर्णय तय करते हैं। इसलिए स्कोरबोर्ड पर सिर्फ “एनबी” देखकर फैसला न करें; पहले गेंद का प्रकार, प्रारूप और अंपायर का संकेत देखें।

अंपायर क्रिकेट मैदान पर नो-बॉल का संकेत देते हुए, पीछे गेंदबाज़ और बल्लेबाज़ तनावपूर्ण मुद्रा में

नो-बॉल समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि इसे गेंदबाज़ी की वैधता की जाँच मानिए। गेंद तेज हो या स्पिन, नियम उसके लिए अलग दरवाज़ा नहीं खोलते—काश ऐसा होता, तो हर तेज़ गेंदबाज़ अपनी गलती को “कलात्मक स्वतंत्रता” कह देता। क्रिकेट गाइड पर इस विषय को समझते समय तीन बातें हमेशा अलग रखें: नो-बॉल का कारण, मिलने वाला अतिरिक्त रन और अगली गेंद पर लागू अधिकार। एमसीसी का क्रिकेट नियमों का आधिकारिक संग्रह इन नियमों का मूल संदर्भ है, जबकि आईसीसी के खेल-विशिष्ट नियम अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अतिरिक्त प्रावधान जोड़ सकते हैं। नीचे दिए गए उदाहरणों में फ्रंट-फुट नो-बॉल, बैक-फुट स्थिति, बाउंसर, बीमर, फ्री-हिट और नो-बॉल पर आउट होने की सीमाएँ शामिल हैं। पहले यह याद रखिए कि नो-बॉल पर गेंद ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती; यानी गेंदबाज़ को अतिरिक्त गेंद डालनी पड़ती है।

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मिथक 1: क्या हर ऊँची गेंद नो-बॉल होती है?

नहीं, हर ऊँची गेंद नो-बॉल नहीं होती। कमर से ऊपर की फुल टॉस, जो बल्लेबाज़ के खड़े होने की स्थिति में क्रीज़ पर पहुँचते समय कमर के ऊपर हो, सामान्यतः नो-बॉल मानी जाती है; लेकिन उछलकर बल्लेबाज़ के सिर या कंधे तक पहुँचने वाली गेंद के लिए बाउंसर संबंधी सीमाएँ लागू होती हैं। निर्णय गेंद की ऊँचाई, पिचिंग और मैच प्रारूप पर निर्भर करता है।

यहाँ सबसे अधिक भ्रम बीमर और बाउंसर को लेकर होता है। बीमर वह गेंद है जो बिना पिच हुए बल्लेबाज़ की कमर से ऊपर पहुँचती है, विशेषकर तेज़ गेंदबाज़ी में। ऐसी गेंद नो-बॉल हो सकती है और यदि अंपायर उसे खतरनाक माने, तो गेंदबाज़ पर चेतावनी या आगे की कार्रवाई भी हो सकती है। इसके विपरीत, बाउंसर पिच के बाद उछलती है। टेस्ट क्रिकेट में बाउंसर की सीमा और एकदिवसीय तथा ट्वेंटी-20 क्रिकेट में बाउंसर की अनुमति अलग हो सकती है; इसलिए 2026 के किसी मैच में लागू प्रतियोगिता नियम देखना जरूरी है। आईसीसी के अनुसार, खतरनाक ऊँची फुल टॉस पर अंपायर केवल रन नहीं जोड़ता, बल्कि खिलाड़ी सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। [क्रिकेट में बाउंसर और बीमर का अंतर](Internal Link: क्रिकेट में बाउंसर और बीमर का अंतर) पढ़ने पर यह भेद और साफ होगा। अंपायर का हाथ ऊपर उठना नो-बॉल का संकेत है; गेंद की ऊँचाई अकेले पर्याप्त प्रमाण नहीं।

ध्यान रहे, बल्लेबाज़ के कद से भी निर्णय प्रभावित हो सकता है। कमर की ऊँचाई स्थिर मैदान-रेखा नहीं है; अंपायर गेंद के पास पहुँचने के क्षण बल्लेबाज़ की सामान्य खड़ी मुद्रा का आकलन करता है। इसी कारण टेलीविजन पर एक ही गेंद अलग कोणों से अलग दिख सकती है। तकनीक मदद करती है, लेकिन अंतिम निर्णय एमसीसी कानून और प्रतियोगिता की खेल शर्तों से ही बनता है।

मिथक 2: क्या नो-बॉल पर बल्लेबाज़ हमेशा फ्री-हिट पाता है?

नहीं, फ्री-हिट हर प्रारूप में लागू नहीं होती। सीमित ओवरों के अंतरराष्ट्रीय मैचों, जैसे आईसीसी एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 मुकाबलों में, सामान्य नो-बॉल के बाद अगली गेंद फ्री-हिट होती है; टेस्ट क्रिकेट में यह सुविधा नहीं दी जाती। फ्री-हिट पर बल्लेबाज़ को रन-आउट, स्टंपिंग के कुछ तकनीकी मामलों और अन्य सीमित तरीकों से आउट किया जा सकता है।

फ्री-हिट का अर्थ “बल्लेबाज़ अजेय है” नहीं है। इसका अर्थ इतना है कि पिछली नो-बॉल के बाद अगली वैध डिलीवरी पर बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू और हिट-विकेट जैसे सामान्य आउट आम तौर पर लागू नहीं होते, यदि गेंद की स्थिति और कानून उस निष्कर्ष की अनुमति न दें। उदाहरण के लिए, बल्लेबाज़ फ्री-हिट पर क्रीज़ से बाहर निकलता है और गेंद विकेटकीपर के हाथ में चली जाती है, तो स्टंपिंग संभव हो सकती है। इसी तरह रन लेते समय क्रीज़ से बाहर रहने पर रन-आउट हो सकता है। नियमों की यह बारीकी वह जगह है जहाँ दर्शक अक्सर अंपायर को दोष देते हैं; बेचारा अंपायर पहले ही छह कैमरों, दो अपीलों और एक बहुत आत्मविश्वासी कमेंटेटर से घिरा होता है।

आईसीसी की सीमित ओवरों की खेल शर्तों में फ्री-हिट का संकेत अंपायर द्वारा दिया जाता है, और यदि नो-बॉल के बाद अगली गेंद भी नो-बॉल या वाइड हो, तो फ्री-हिट अगली वैध गेंद तक बनी रहती है। आईसीसी के आधिकारिक खेल नियम प्रारूप के अनुसार बदलाव स्पष्ट करते हैं। इसलिए मैच देखते समय यह तीन चरणों में जाँचें:

  1. क्या पिछली डिलीवरी नो-बॉल थी?
  2. क्या मुकाबला एकदिवसीय या ट्वेंटी-20 प्रारूप का था?
  3. क्या अगली डिलीवरी वैध गेंद थी या फिर वाइड/नो-बॉल?

स्कोरबोर्ड पर नो-बॉल और फ्री-हिट प्रदर्शित, बल्लेबाज़ क्रीज़ पर आक्रामक शॉट के लिए तैयार

फ्री-हिट के व्यावहारिक असर को समझना चाहते हैं? अगले उदाहरण में गेंद की वैधता और आउट होने की स्थिति साथ-साथ देखें।

नियम देखें

मिथक 3: क्या नो-बॉल पर बल्लेबाज़ कभी आउट नहीं हो सकता?

यह दावा पूरी तरह गलत है। नो-बॉल पर बल्लेबाज़ रन-आउट, स्टंपिंग, हिट-द-बॉल-ट्वाइस और ऑब्स्ट्रक्टिंग-द-फील्ड जैसे सीमित तरीकों से आउट हो सकता है, जबकि बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू और हिट-विकेट सामान्यतः मान्य नहीं होते। इसलिए नो-बॉल बल्लेबाज़ को सुरक्षा देती है, पूर्ण छूट नहीं।

नो-बॉल पर आउट होने की सूची याद रखने के लिए इसे दो हिस्सों में बाँटिए। पहला हिस्सा है गेंद से सीधे जुड़ी सामान्य बर्खास्तगी—बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू और हिट-विकेट—जो नो-बॉल के कारण अमान्य हो जाती हैं। दूसरा हिस्सा बल्लेबाज़ की अगली गतिविधि से जुड़ा है—दौड़ते समय रन-आउट, क्रीज़ से आगे निकलने पर स्टंपिंग, गेंद को जानबूझकर दो बार खेलने पर हिट-द-बॉल-ट्वाइस और क्षेत्ररक्षण में बाधा डालने पर ऑब्स्ट्रक्टिंग-द-फील्ड। इन चारों का निर्णय अलग-अलग तथ्य पर निर्भर करता है।

एमसीसी नियम 21 नो-बॉल की वैधता और दंड से जुड़ा है, जबकि नियम 38 रन-आउट और नियम 39 स्टंपिंग से संबंधित हैं। आधिकारिक नियमों में यह सिद्धांत स्पष्ट है कि नो-बॉल पर “बल्लेबाज़ को आउट नहीं किया जाएगा” कहना पूर्ण वाक्य नहीं है; सही बात है, “कुछ तरीकों से आउट नहीं किया जाएगा।” यही छोटा-सा शब्द “कुछ” टीवी बहसों में पूरे ओवर जितना लंबा हो जाता है। एमसीसी नियम 21 और संबंधित नियम को संदर्भ के रूप में सुरक्षित रखना उपयोगी है।

असल में क्या काम करता है: नो-बॉल पहचानने की सही प्रक्रिया?

नो-बॉल की सही पहचान के लिए पहले गेंदबाज़ के पैर, फिर गेंद की ऊँचाई, उसके बाद क्षेत्ररक्षण और अंत में प्रारूप की खेल शर्तें जाँचें। अंपायर का संकेत प्राथमिक निर्णय है, जबकि तीसरे अंपायर की सहायता उपलब्ध होने पर फ्रंट-फुट, कमर से ऊपर फुल टॉस और कैच जैसी घटनाओं की समीक्षा की जा सकती है। इस क्रम से भ्रम और गलत दावे दोनों कम होते हैं।

1. फ्रंट-फुट और बैक-फुट जाँच

गेंद छोड़ते समय गेंदबाज़ का अगला पैर पॉपिंग क्रीज़ के पीछे होना चाहिए और उसका कुछ हिस्सा क्रीज़ के पीछे या उसके ऊपर रहना चाहिए। यदि पूरा अगला पैर क्रीज़ के आगे चला जाता है, तो फ्रंट-फुट नो-बॉल होती है। गेंदबाज़ का पिछला पैर रिटर्न क्रीज़ की सीमाओं से बाहर नहीं होना चाहिए; यह नियम बाएँ और दाएँ हाथ के गेंदबाज़ के कोण के अनुसार अलग दिखाई दे सकता है।

2. गेंद की ऊँचाई और पिचिंग

कमर से ऊपर फुल टॉस, सिर के ऊपर जाने वाली खतरनाक गेंद और एक ओवर में अनुमत बाउंसर की संख्या प्रतियोगिता नियमों के अनुसार जाँची जाती है। टेस्ट, एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 क्रिकेट में बाउंसर सीमा समान मान लेना बड़ी भूल है। 2026 में भी प्रसारण ग्राफिक्स सहायक हैं, लेकिन वे एमसीसी या आईसीसी के नियमों का स्थान नहीं लेते।

3. क्षेत्ररक्षण और विकेटकीपर की स्थिति

विकेटकीपर को गेंद डाले जाने के समय विकेट के पीछे रहना चाहिए, सिवाय उन परिस्थितियों के जिन्हें नियम अनुमति देते हैं। क्षेत्ररक्षकों की संख्या और स्थिति भी कुछ प्रारूपों में सीमित होती है। यदि क्षेत्ररक्षण की पाबंदी टूटती है, तो अंपायर नो-बॉल दे सकता है, भले ही गेंद पैरों और ऊँचाई के हिसाब से वैध हो।

4. स्कोर और ओवर की गणना

नो-बॉल पर कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है। बल्लेबाज़ के बल्ले से बने रन या दौड़े गए बाई/लेग-बाई रन अलग से जुड़ सकते हैं, लेकिन नो-बॉल का अतिरिक्त रन अलग मद में दर्ज होता है। गेंद ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती; इसलिए 6 वैध गेंदों के साथ 1 या उससे अधिक नो-बॉल होने पर ओवर में छह से अधिक डिलीवरी हो सकती हैं।

“नो-बॉल का मतलब केवल एक रन” कहना गलत है, क्योंकि 1 अतिरिक्त रन न्यूनतम दंड है, अंतिम कुल नहीं। मसलन, बल्लेबाज़ नो-बॉल पर छक्का मारता है तो टीम को नो-बॉल का अतिरिक्त रन और बल्ले से बने छह रन मिलते हैं। यदि गेंद बल्ले से नहीं लगी और सीमा पार चली गई, तो अतिरिक्त रन का वर्गीकरण परिस्थिति के अनुसार बदल सकता है। स्कोरर का रिकॉर्ड अंपायर के निर्णय और गेंद की वास्तविक घटना दोनों पर आधारित होता है।

अब इस क्रम को मैच-स्थिति पर लागू करें और हर नो-बॉल के कारण को अलग दर्ज करें।

विवरण समझें

क्या अनदेखा करना चाहिए: नो-बॉल से जुड़े लोकप्रिय भ्रम

नो-बॉल पर सबसे अधिक गलतियाँ अधूरी जानकारी से होती हैं। “हर ऊँची गेंद नो-बॉल है”, “फ्री-हिट पर आउट नहीं हो सकता” और “नो-बॉल हमेशा सिर्फ एक रन देती है”—ये तीनों दावे बिना संदर्भ के गलत हैं। दर्शक को अंपायर का संकेत, प्रारूप, गेंद की पिचिंग और स्कोरिंग वर्गीकरण साथ देखना चाहिए; केवल रिप्ले के एक कोण से फैसला करना वैसा ही है जैसे आधी किताब पढ़कर परीक्षा में उत्तर लिखना।

इन बातों को अनदेखा करना चाहिए:

  • टेस्ट क्रिकेट में फ्री-हिट अपने-आप लागू होती है।
  • कमर से ऊपर की हर गेंद बीमर होती है।
  • नो-बॉल पर कैच होने पर बल्लेबाज़ हर स्थिति में आउट होता है।
  • नो-बॉल का अतिरिक्त रन बल्लेबाज़ के निजी स्कोर में जुड़ता है।
  • नो-बॉल ओवर की छह गेंदों में गिनी जाती है।
  • अंपायर की गलती होने पर हर निर्णय तीसरा अंपायर बदल सकता है।

इनमें अंतिम बिंदु विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। तीसरा अंपायर उन्हीं घटनाओं की समीक्षा कर सकता है जिनके लिए तकनीकी समीक्षा उपलब्ध हो और मैच नियम अनुमति दें। फ्रंट-फुट नो-बॉल की जाँच कई अंतरराष्ट्रीय मैचों में की जा सकती है, लेकिन स्थानीय क्लब क्रिकेट में कैमरा या समीक्षा व्यवस्था न हो तो मैदानी अंपायर का निर्णय अंतिम रहता है। इसी तरह प्रतियोगिता आयोजक बाउंसर सीमा, फ्री-हिट और खतरनाक गेंदबाज़ी की शर्तें अलग से प्रकाशित कर सकता है। किसी स्थानीय टूर्नामेंट में आईसीसी नियम का नाम देखकर यह मान लेना कि हर उप-नियम हूबहू लागू है, अनुभवी गलती है—और क्रिकेट में अनुभवी गलती भी स्कोरबोर्ड पर बहुत मासूम दिखती है।

क्रिकेट स्कोरर हाथ से नो-बॉल रन दर्ज करते हुए, पास में नियम पुस्तिका और लाल गेंद रखी है

क्रिकेट गाइड के [स्कोरिंग नियमों की शुरुआती मार्गदर्शिका](Internal Link: क्रिकेट स्कोरिंग और अतिरिक्त रन) के साथ यह सूची पढ़ने पर नो-बॉल, वाइड, बाई और लेग-बाई का अंतर भी स्पष्ट होगा। आधिकारिक स्रोत के रूप में विकिपीडिया का नो-बॉल विवरण प्रारंभिक संदर्भ दे सकता है, लेकिन विवादित निर्णय में एमसीसी और आईसीसी के मूल दस्तावेजों को प्राथमिकता दें।

सबसे उपयोगी व्यावहारिक नियम यह है: पहले “नो-बॉल क्यों दी गई?” पूछें, फिर “कितने रन मिले?” और अंत में “अगली गेंद पर क्या लागू होगा?” इन तीन सवालों से फ्रंट-फुट गलती, बीमर, फ्री-हिट और आउट होने की स्थिति अलग-अलग समझ में आती है। एमसीसी का मूल सिद्धांत सरल है: “नो-बॉल ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती।” यही एक पंक्ति ओवर की गणना, अतिरिक्त गेंद और रणनीतिक दबाव—तीनों को समझाती है।

निष्कर्ष: नो-बॉल का सही फैसला कैसे करें?

नो-बॉल का निर्णय चार आधारों पर करें: गेंदबाज़ का पैर, गेंद की ऊँचाई, क्षेत्ररक्षण की स्थिति और मैच का प्रारूप। सामान्यतः 1 अतिरिक्त रन मिलता है, गेंद ओवर की वैध छह गेंदों में नहीं गिनी जाती और सीमित ओवरों में अगली गेंद फ्री-हिट होती है। फिर भी रन-आउट और स्टंपिंग जैसे सीमित आउट संभव रहते हैं। 2026 के किसी मैच में अंतिम निष्कर्ष के लिए प्रसारण ग्राफिक्स के साथ आईसीसी या एमसीसी की लागू खेल शर्तें पढ़ें।

अब अगली बार अंपायर का हाथ ऊपर उठे तो केवल शोर मत कीजिए—कारण पहचानिए, स्कोर समझिए और फ्री-हिट की स्थिति जाँचिए। क्रिकेट गाइड पर [उन्नत गेंदबाज़ी रणनीति](Internal Link: तेज गेंदबाज़ी और स्पिन रणनीति) पढ़कर आप यह भी देख सकते हैं कि गेंदबाज़ नो-बॉल के जोखिम को कैसे घटाते हैं। नियम याद करने का सबसे छोटा सूत्र है: “पैर, ऊँचाई, स्थिति, प्रारूप।” इसे याद रखिए; क्रिकेट की आधी बहसें अपने-आप शांत हो जाएँगी।

अधिक क्रिकेट नियम, मैच समीक्षा और खिलाड़ी आँकड़ों के लिए आगे पढ़ें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्रिकेट में नो-बॉल क्या होती है?

उत्तर: नो-बॉल वह अमान्य डिलीवरी है जिसमें गेंदबाज़ गेंद फेंकते समय क्रिकेट के निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है। फ्रंट-फुट का क्रीज़ से आगे जाना, कमर से ऊपर फुल टॉस और कुछ क्षेत्ररक्षण उल्लंघन इसके प्रमुख कारण हैं। सामान्यतः क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम के विरुद्ध 1 अतिरिक्त रन दिया जाता है। गेंद ओवर की छह वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती, इसलिए गेंदबाज़ को अतिरिक्त डिलीवरी डालनी पड़ती है।

प्रश्न: नो-बॉल कैसे पहचानी जाती है?

उत्तर: नो-बॉल पहचानने के लिए पहले गेंदबाज़ के अगले पैर की स्थिति, फिर गेंद की ऊँचाई और उसके बाद क्षेत्ररक्षण की स्थिति देखें। यदि अगला पैर पॉपिंग क्रीज़ से पूरी तरह आगे चला गया हो, तो फ्रंट-फुट नो-बॉल होती है। कमर से ऊपर बिना पिच हुई तेज गेंद भी नो-बॉल हो सकती है। अंतिम निर्णय मैदानी अंपायर देता है और उपलब्ध होने पर तीसरा अंपायर तकनीकी समीक्षा कर सकता है।

प्रश्न: नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?

उत्तर: नो-बॉल गेंदबाज़ी की वैधता या सुरक्षा नियम के उल्लंघन से जुड़ी होती है, जबकि वाइड ऐसी गेंद होती है जो बल्लेबाज़ की पहुँच से बाहर और निर्धारित चौड़ाई या ऊँचाई के कारण अनुचित मानी जाती है। दोनों पर सामान्यतः 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर की वैध छह गेंदों में नहीं गिनी जाती। सीमित ओवरों में नो-बॉल के बाद फ्री-हिट मिल सकती है, लेकिन वाइड के बाद सामान्यतः नहीं।

प्रश्न: नो-बॉल पर फ्री-हिट कब मिलती है?

उत्तर: सीमित ओवरों के अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय और ट्वेंटी-20 मैचों में सामान्य नो-बॉल के बाद अगली गेंद फ्री-हिट होती है। टेस्ट क्रिकेट में यह नियम लागू नहीं होता। यदि फ्री-हिट वाली गेंद फिर नो-बॉल या वाइड हो जाए, तो फ्री-हिट अगली वैध गेंद तक जारी रहती है। फ्री-हिट पर बल्लेबाज़ रन-आउट या कुछ तकनीकी तरीकों से आउट हो सकता है।

प्रश्न: क्या नो-बॉल पर बल्लेबाज़ कैच आउट हो सकता है?

उत्तर: सामान्य स्थिति में नो-बॉल पर बल्लेबाज़ कैच आउट नहीं होता। हालांकि, यदि गेंद के बाद बल्लेबाज़ दौड़ते समय रन-आउट हो जाए या कोई अलग वैध बर्खास्तगी लागू हो, तो आउट दिया जा सकता है। नो-बॉल पर बोल्ड, एलबीडब्ल्यू, कैच और हिट-विकेट सामान्यतः मान्य नहीं होते। इसलिए कैच पकड़े जाने के बाद अंपायर का नो-बॉल संकेत देखना जरूरी है।

प्रश्न: नो-बॉल पर कितने रन मिलते हैं?

उत्तर: नो-बॉल पर न्यूनतम 1 अतिरिक्त रन मिलता है, लेकिन कुल रन इससे अधिक हो सकते हैं। बल्लेबाज़ छक्का लगाए तो नो-बॉल का 1 अतिरिक्त रन और बल्ले से बने 6 रन स्कोर में जुड़ते हैं। गेंद बल्ले से न लगने पर दौड़े गए रन, बाई या लेग-बाई का वर्गीकरण अलग हो सकता है। नो-बॉल का अतिरिक्त रन बल्लेबाज़ के निजी स्कोर में नहीं जुड़ता।

प्रश्न: अगर अंपायर नो-बॉल न दे तो क्या किया जा सकता है?

उत्तर: यदि समीक्षा व्यवस्था उपलब्ध हो और मैच नियम अनुमति दें, तो कुछ नो-बॉल निर्णयों की तीसरे अंपायर से जाँच हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फ्रंट-फुट नो-बॉल की तकनीकी निगरानी अधिक सामान्य है, लेकिन स्थानीय क्लब क्रिकेट में मैदानी अंपायर का निर्णय अंतिम हो सकता है। दर्शक को प्रसारण संकेत, अंपायर का हाथ और प्रतियोगिता की समीक्षा नीति देखनी चाहिए। हर विवादित गेंद स्वतः समीक्षा योग्य नहीं होती।

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