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डीआरएस के भीतर: 3-चरणीय फैसला

क्रिकेट में डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी जांच करती है और टेस्ट, एकदिवसीय तथा टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में निष्पक्षता बढ़ाती है। बल्लेबाज या कप्तान आमतौर पर 15 से...

19 अक्टूबर 2026 5 min read
डीआरएस के भीतर: 3-चरणीय फैसला
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डीआरएस के भीतर: 3-चरणीय फैसला

क्रिकेट में डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी जांच करती है और टेस्ट, एकदिवसीय तथा टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में निष्पक्षता बढ़ाती है। बल्लेबाज या कप्तान आमतौर पर 15 सेकंड के भीतर दोनों हाथों से “टी” संकेत देकर समीक्षा मांगते हैं; तीसरे अंपायर हॉक-आई गेंद-ट्रैकिंग, अल्ट्राएज और उपलब्ध होने पर हॉट स्पॉट देखते हैं। एल्बीडब्ल्यू समीक्षा में गेंद के पिच होने, पैड से टकराने और स्टंप पर असर पड़ने—इन तीन चरणों का विश्लेषण होता है। टेस्ट और एकदिवसीय में प्रायः प्रत्येक पारी में दो असफल समीक्षाएं, जबकि टी20 अंतरराष्ट्रीय में एक समीक्षा मिलती है; प्रतियोगिता की शर्तें अंतिम होती हैं। “अंपायर्स कॉल” रहने पर मूल निर्णय कायम रहता है और समीक्षा आम तौर पर बची रहती है। फैसला बदलने से पहले संकेत, समय और तकनीकी उपलब्धता जांचना सबसे सुरक्षित तरीका है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान पर कप्तान दोनों हाथों से डीआरएस का टी संकेत देता हुआ

क्रिकेट देखने वाले अक्सर डीआरएस को जादुई कैमरा समझ लेते हैं, जैसे तीसरा अंपायर भविष्य देखकर फैसला सुनाता हो। असल में यह अलग-अलग प्रमाणों को क्रम से जांचने वाली प्रक्रिया है, जिसमें मैदानी अंपायर का मूल निर्णय भी महत्वपूर्ण रहता है। क्रिकेट गाइड पर इसका उद्देश्य सट्टे जैसा अनुमान लगाना नहीं, बल्कि खेल के नियम, तकनीक और रणनीति साफ करना है; आखिर गलत समीक्षा पर टीम का सीमित मौका चला जाता है, और वह कोई सस्ता रिचार्ज कूपन नहीं होता।

और पहले मूल नियम समझना चाहते हैं? यह संक्षिप्त मार्गदर्शिका आगे की हर समीक्षा को पढ़ना आसान बनाएगी।

और जानें

अगर बल्लेबाज आउट दिया जाए, तो क्या करना चाहिए?

आउट दिए गए बल्लेबाज को तुरंत कप्तान या साथी से सलाह लेकर 15 सेकंड के भीतर समीक्षा का संकेत देना चाहिए। मैदान पर बल्लेबाज स्वयं संकेत कर सकता है, लेकिन अंतिम अनुरोध कप्तान की जिम्मेदारी माना जाता है और समय समाप्त होने के बाद तीसरा अंपायर समीक्षा स्वीकार नहीं करता।

समीक्षा मांगने से पहले तीन सवाल पूछना उपयोगी है: क्या गेंद ने बल्ले को छुआ, क्या पैड पर लगने से पहले बल्ला आगे था, और क्या एल्बीडब्ल्यू की गेंद स्टंप पर लगती? कैच के मामलों में अल्ट्राएज ध्वनि और वीडियो क्रम महत्वपूर्ण होते हैं; केवल धीमी गति में गेंद के पास से गुजरना किनारा सिद्ध नहीं करता। विकेटकीपर का आत्मविश्वास भी प्रमाण नहीं है, चाहे वह इतना दृढ़ क्यों न हो कि पूरी स्लिप खिसक जाए।

  • पहले मैदानी अंपायर का संकेत और गेंद की वैधता देखें।
  • बल्ले और पैड के संपर्क का क्रम जांचें।
  • समीक्षा बची है या नहीं, यह स्कोरबोर्ड से पक्का करें।

क्रिकेट में एल्बीडब्ल्यू नियम की पूरी व्याख्या

अगर टीम को एल्बीडब्ल्यू पर संदेह हो, तो समीक्षा कैसे लें?

एल्बीडब्ल्यू डीआरएस में गेंद का पिचिंग क्षेत्र, इम्पैक्ट स्थान और स्टंप पर संभावित असर देखा जाता है। यदि गेंद का अनुमानित प्रभाव सीमा-रेखा पर हो, तो “अंपायर्स कॉल” मूल फैसले को कायम रखती है; इसलिए हर करीबी गेंद समीक्षा जीत में नहीं बदलती।

हॉक-आई का अनुमान कैमरों से मिले बिंदुओं और गेंद की गति पर आधारित होता है, न कि किसी अदृश्य निश्चित रेखा पर। विशेष रूप से पैड के आगे आने, रिवर्स स्विंग और उछाल बदलने वाले विकेट पर परिणाम की सीमा समझना जरूरी है। यदि मैदानी अंपायर ने आउट दिया और गेंद का कुछ हिस्सा स्टंप से टकराने की सीमा में है, तो अंपायर्स कॉल आउट को बनाए रख सकती है। यदि नॉट आउट दिया गया था और वही सीमा लागू हुई, तो बल्लेबाज बच जाता है।

आईसीसी की खेल-शर्तों में समीक्षा का उद्देश्य स्पष्ट त्रुटि सुधारना है, हर संदेह को आउट में बदलना नहीं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की नियम-सामग्री और प्रतियोगिता की आधिकारिक शर्तें अंतिम संदर्भ हैं। एक व्यावहारिक, कम चर्चित बात यह है कि पिचिंग के बाहर होने पर एल्बीडब्ल्यू समाप्त हो जाता है, चाहे आगे का प्रक्षेपण स्टंप पर क्यों न जा रहा हो।

क्या आप एल्बीडब्ल्यू के तीन चरणों को उदाहरण सहित देखना चाहते हैं? यहां समीक्षा-क्रम को गेंद-दर-गेंद समझें।

विवरण देखें

तीसरा अंपायर बड़े स्क्रीन पर एल्बीडब्ल्यू गेंद-ट्रैकिंग ग्राफिक्स की जांच करता हुआ

अगर कैच या किनारे पर सवाल हो, तो क्या देखना चाहिए?

कैच और बल्ले के किनारे वाली समीक्षा में अल्ट्राएज या स्निकोमीटर ध्वनि संकेत, वीडियो और गेंद-बल्ले की निकटता को साथ पढ़ता है। हॉट स्पॉट उपलब्ध होने पर इन्फ्रारेड चित्र संपर्क-स्थान दिखा सकता है, लेकिन हर मैदान और हर प्रसारण व्यवस्था में सभी तकनीक अनिवार्य रूप से उपलब्ध नहीं होती।

तीसरा अंपायर पहले देखता है कि गेंद वैध थी या नहीं, फिर बल्ले से संपर्क और कैच की पूर्णता जांचता है। जमीन छूने से पहले गेंद पर नियंत्रण, उंगलियों की स्थिति और गेंद के नीचे का दृश्य निर्णायक हो सकते हैं। इसलिए एक ही कोण देखकर फैसला देना गलत है; सामने, पीछे और ऊंचे कोणों की जरूरत पड़ सकती है। अल्ट्राएज में छोटी ध्वनि का अर्थ हमेशा बल्ले का किनारा नहीं होता—जूते, पैड या जमीन भी संकेत पैदा कर सकते हैं।

तकनीकी सीमा समझना दर्शक को बेहतर निर्णय-पाठक बनाता है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियम में कैच की वैधता और गेंद पर नियंत्रण से जुड़े मूल सिद्धांत दिए गए हैं। आधिकारिक नियमों का सार यही है: “अंपायर का निर्णय तब तक कायम रहता है, जब तक समीक्षा में स्पष्ट प्रमाण से बदलाव उचित न हो।” यह वाक्य समीक्षा की सावधानी बताता है, चमत्कार नहीं।

क्रिकेट में कैच आउट और नॉट आउट के नियम

आम गलतियां कौन-सी हैं और उनसे कैसे बचें?

डीआरएस में सबसे महंगी गलतियां जल्दबाजी, अपील के शोर पर निर्भरता और समीक्षा की शेष संख्या भूलना हैं। असफल समीक्षा सीमित कोटा घटाती है, जबकि सफल समीक्षा या अंपायर्स कॉल के बाद समीक्षा सामान्यतः बची रहती है; फिर भी किसी मैच की विशेष खेल-शर्तें अलग प्रावधान दे सकती हैं।

टीमों को समीक्षा संकेत देने से पहले संक्षिप्त प्रक्रिया अपनानी चाहिए:

  1. गेंद बल्ले से लगी या नहीं, विकेटकीपर और बल्लेबाज से तुरंत पूछें।
  2. गेंद की वैधता और नो-बॉल की स्थिति जांचें।
  3. एल्बीडब्ल्यू में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट क्रम अलग-अलग सोचें।
  4. कप्तान को 15 सेकंड की सीमा के भीतर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
  5. तकनीकी प्रसारण उपलब्ध न हो तो मैदानी अंपायर का फैसला अधिक निर्णायक हो सकता है।

एक महत्वपूर्ण अंतर भी याद रखें: मैदानी अंपायर की समीक्षा और स्वतः जाँच एक ही चीज नहीं हैं। रन-आउट, स्टंपिंग और बाउंड्री जैसे मामलों में तीसरा अंपायर कई बार नियमों के तहत स्वतः देख सकता है, जबकि खिलाड़ी समीक्षा अलग प्रक्रिया है। भारत में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, इंग्लैंड में इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड तथा आईसीसी आयोजनों में अलग-अलग तकनीकी प्रोटोकॉल दिख सकते हैं।

फैसले के पीछे की तकनीक और नियम को साथ समझना चाहते हैं? अगले विश्लेषण में यही अंतर सबसे अधिक काम आएगा।

रणनीति समझें

क्रिकेट प्रसारण कक्ष में ऑपरेटर अल्ट्राएज और हॉक-आई स्क्रीन साथ-साथ देखता हुआ

30-दिन की नियम-जांच में क्या दोहराना चाहिए?

तीस दिनों की नियमित समीक्षा का अर्थ मैच के बाद खिलाड़ियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन नहीं, बल्कि डीआरएस नियमों और तकनीकी शब्दों की अपनी समझ जांचना है। हर सप्ताह एक एल्बीडब्ल्यू, एक कैच और एक रन-आउट समीक्षा देखकर मूल निर्णय, तीसरे अंपायर का कारण और अंतिम परिणाम लिखना उपयोगी अभ्यास है।

इस अभ्यास में आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता दें, क्योंकि सोशल मीडिया पर प्रसारित छोटे वीडियो अक्सर अधूरे कोण दिखाते हैं। विकिपीडिया का निर्णय समीक्षा प्रणाली पृष्ठ बुनियादी ढांचा समझने में मदद कर सकता है, जबकि आईसीसी की प्रतियोगिता-विशेष खेल-शर्तें समीक्षा की संख्या और तकनीकी उपलब्धता स्पष्ट करती हैं। महीने के अंत में इन बिंदुओं पर स्वयं को परखें:

  • क्या 15 सेकंड की समीक्षा-सीमा याद है?
  • क्या अंपायर्स कॉल को समीक्षा की विफलता समझने की गलती नहीं करेंगे?
  • क्या टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 में समीक्षा संख्या का अंतर पता है?
  • क्या अल्ट्राएज, हॉक-आई और हॉट स्पॉट की भूमिकाएं अलग कर सकते हैं?

क्रिकेट गाइड पर सही निष्कर्ष यह है कि डीआरएस अंपायर को हटाता नहीं, बल्कि प्रमाणों से निर्णय को मजबूत करता है। टीवी ग्राफिक्स आकर्षक हैं, मगर अंतिम फैसला नियम, उपलब्ध फुटेज और मैदानी निर्णय के संबंध से निकलता है। यही कारण है कि कप्तान की समीक्षा रणनीति तकनीक जितनी ही महत्वपूर्ण रहती है।

क्रिकेट अंपायर संकेतों और नियमों की शब्दावली

निष्कर्ष: डीआरएस को बेहतर समझने का सबसे सरल तरीका

क्रिकेट में डीआरएस तीन स्तरों पर काम करता है: खिलाड़ी समय पर समीक्षा मांगता है, तीसरा अंपायर उपलब्ध तकनीक से प्रमाण जांचता है, और खेल-शर्तों के अनुसार अंतिम फैसला सुनाया जाता है। 15 सेकंड की सीमा, सीमित समीक्षा, अंपायर्स कॉल और तकनीकी उपलब्धता को समझ लेने पर टीवी स्क्रीन के हर “टी” संकेत का अर्थ साफ हो जाता है। एल्बीडब्ल्यू में तीन चरणों का क्रम और कैच में संपर्क तथा नियंत्रण सबसे उपयोगी याद रखने वाले नियम हैं। अगली बार केवल अपील की आवाज पर भरोसा न करें; गेंद की वैधता, संपर्क और संभावित परिणाम को क्रम से पढ़ें। यही छोटी आदत आपको दर्शक से नियम समझने वाले क्रिकेट-प्रेमी में बदलती है, हालांकि कप्तान बनने की गारंटी अभी भी कोई तकनीक नहीं देती।

अगले मैच से पहले इस नियम-सार को सुरक्षित रखें और समीक्षा संकेतों को अधिक समझदारी से पढ़ें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: क्रिकेट में डीआरएस क्या है?

उत्तर: डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के फैसले की तकनीकी पुनःजांच करने की व्यवस्था है। बल्लेबाजी या क्षेत्ररक्षण टीम आमतौर पर कप्तान के माध्यम से 15 सेकंड के भीतर समीक्षा मांगती है। तीसरा अंपायर वीडियो, हॉक-आई, अल्ट्राएज और उपलब्ध अन्य तकनीक देखकर फैसला करता है। इसका उद्देश्य हर करीबी निर्णय बदलना नहीं, बल्कि स्पष्ट गलती सुधारना है।

प्रश्न: डीआरएस कैसे लिया जाता है?

उत्तर: कप्तान दोनों हाथों से “टी” संकेत देकर 15 सेकंड की समय-सीमा में समीक्षा मांगता है। आउट दिए गए बल्लेबाज को तुरंत कप्तान से संवाद करना चाहिए, जबकि नॉट आउट फैसले पर क्षेत्ररक्षण कप्तान समीक्षा ले सकता है। संकेत के बाद तीसरा अंपायर गेंद की वैधता, संपर्क और संबंधित नियमों की जांच करता है। समय समाप्त होने के बाद सामान्यतः समीक्षा स्वीकार नहीं की जाती।

प्रश्न: हॉक-आई और अल्ट्राएज में क्या अंतर है?

उत्तर: हॉक-आई गेंद के प्रक्षेपण और स्टंप पर संभावित असर का अनुमान लगाता है, जबकि अल्ट्राएज गेंद और बल्ले के संपर्क का ध्वनि संकेत दिखाता है। हॉक-आई एल्बीडब्ल्यू में पिचिंग, इम्पैक्ट और विकेट चरणों के लिए उपयोगी है। अल्ट्राएज कैच या किनारे के मामलों में मदद करता है। हॉट स्पॉट उपलब्ध होने पर संपर्क का ऊष्मीय चित्र भी अतिरिक्त प्रमाण दे सकता है।

प्रश्न: अंपायर्स कॉल में समीक्षा क्यों नहीं बदलती?

उत्तर: अंपायर्स कॉल तब लागू होती है जब तकनीकी अनुमान निर्णय-सीमा के बहुत करीब हो और उपलब्ध प्रमाण मूल फैसले को पलटने के लिए पर्याप्त न हो। एल्बीडब्ल्यू में यह प्रायः इम्पैक्ट या विकेट क्षेत्र से जुड़ी होती है। मूल आउट फैसला अंपायर्स कॉल पर आउट रहता है और मूल नॉट आउट फैसला नॉट आउट रहता है। सामान्यतः ऐसी समीक्षा टीम के कोटे से नहीं घटती।

प्रश्न: डीआरएस में समीक्षा कितनी मिलती हैं?

उत्तर: समीक्षा की संख्या प्रारूप और प्रतियोगिता की खेल-शर्तों पर निर्भर करती है; आम तौर पर टेस्ट और एकदिवसीय में प्रति पारी दो तथा टी20 अंतरराष्ट्रीय में प्रति पारी एक समीक्षा मिलती है। सफल समीक्षा या अंपायर्स कॉल के बाद समीक्षा सामान्यतः बची रहती है। असफल समीक्षा घट जाती है। किसी विशेष श्रृंखला में आईसीसी, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड या स्थानीय आयोजक अलग नियम प्रकाशित कर सकते हैं।

प्रश्न: समीक्षा असफल हो जाए तो क्या करना चाहिए?

उत्तर: असफल समीक्षा के बाद टीम को बची हुई समीक्षाओं की संख्या और गलती का कारण तुरंत दर्ज करना चाहिए। कप्तान को देखना चाहिए कि समस्या गलत संपर्क-पढ़ने, जल्दबाजी, नो-बॉल भूलने या अंपायर्स कॉल को गलत समझने से हुई। अगली समीक्षा में विकेटकीपर, बल्लेबाज और गेंदबाज से छोटा, स्पष्ट संवाद अधिक उपयोगी रहता है। केवल भीड़ या प्रसारण ग्राफिक्स के दबाव में समीक्षा लेना जोखिम भरा है।

प्रश्न: क्या डीआरएस हर मैच में उपलब्ध होता है?

उत्तर: नहीं, डीआरएस की उपलब्धता मैच के स्तर, आयोजक, प्रसारण व्यवस्था और नियुक्त तकनीकी दल पर निर्भर करती है। आईसीसी के बड़े अंतरराष्ट्रीय मैचों में हॉक-आई और अल्ट्राएज जैसी सुविधाएं सामान्य हैं, लेकिन घरेलू या छोटे मुकाबलों में कुछ तकनीक अनुपस्थित हो सकती है। ऐसी स्थिति में खेल-शर्तें बताती हैं कि कौन-सी समीक्षा उपलब्ध है। दर्शकों को स्क्रीन पर दिख रहे उपकरणों के आधार पर ही तकनीकी निष्कर्ष निकालना चाहिए।

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