क्रिकेट नियम: 5 बदलाव 2026 तक
क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए समझने का सबसे आसान तरीका है खेल को बल्लेबाजी, गेंदबाजी, विकेट, रन और ओवर में बाँटना। क्रिकेट गाइड भारत, इंग्लैंड और दुनिया भर के नए प्रशंसकों को बताता है कि एक टीम में 11 खिलाड़ी होते हैं, सीमित ओवर मैच में प्रत्येक पारी 20 या 50 ओवर की हो सकती है और एक ओवर में सामान्यतः 6 वैध गेंदें होती हैं। 1877 के पहले आधिकारिक टेस्ट से लेकर 2017 में लागू हुए एमसीसी के क्रिकेट नियम तक खेल में कम-से-कम 5 बड़े बदलाव आए, जिनमें ओवरआर्म गेंदबाजी, सीमित ओवर क्रिकेट और डीआरएस शामिल हैं। आईसीसी मैच की परिस्थितियों में तकनीकी नियम जोड़ता है, जबकि बीसीसीआई भारत में प्रतियोगिताओं को संचालित करता है। शुरुआत में स्कोरकार्ड पढ़ना, वैध गेंद पहचानना और विकेट गिरने के तरीके याद करना सबसे उपयोगी कदम है।

क्रिकेट बाहर से ऐसा खेल दिखता है जिसमें एक आदमी लकड़ी घुमाता है और बाकी लोग गेंद के पीछे दौड़ते हैं। यह वर्णन तकनीकी रूप से गलत नहीं, बस उतना ही अधूरा है जितना बिना नमक की दाल। असल में क्रिकेट में दो टीमें बारी-बारी से बल्लेबाजी और गेंदबाजी करती हैं; लक्ष्य विपक्षी टीम से अधिक रन बनाना होता है। टेस्ट क्रिकेट में एक टीम को दो पारियाँ मिल सकती हैं, जबकि एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट में सामान्यतः एक-एक पारी होती है। क्रिकेट गाइड की यह शुरुआती मार्गदर्शिका खेल के नियमों को मैदान की तस्वीरों और स्कोरकार्ड के संकेतों से जोड़कर समझाएगी। पहले यह याद रखिए कि नियम जानना आपको तुरंत अच्छा बल्लेबाज नहीं बनाएगा, लेकिन कम-से-कम आप अपील के समय गलत टीम के लिए चिल्लाएँगे नहीं। आगे बढ़ने से पहले शुरुआती क्रिकेट शब्दावली गाइड देखना भी उपयोगी रहेगा।
क्रिकेट के ऐतिहासिक बदलावों को समझना भी जरूरी है। 1864 में ओवरआर्म गेंदबाजी को स्वीकार किया गया, 1877 में पहला आधिकारिक टेस्ट खेला गया, 1971 में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट शुरू हुआ और 2003 में टी20 प्रारूप को आधिकारिक पहचान मिलने लगी। निर्णय समीक्षा प्रणाली, जिसे आम तौर पर डीआरएस कहा जाता है, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2008 के बाद धीरे-धीरे शामिल हुई। क्रिकेट का इतिहास इन परिवर्तनों को अधिक विस्तार से दर्ज करता है। इसलिए 2026 में क्रिकेट समझने का अर्थ केवल बल्ले और गेंद का हिसाब जानना नहीं, बल्कि यह भी समझना है कि प्रारूप के अनुसार पावरप्ले, समीक्षा और फील्डिंग प्रतिबंध बदल सकते हैं।
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मिथक 1: क्या हर गेंद पर रन बनाना जरूरी है?
नहीं, हर गेंद पर रन बनाना जरूरी नहीं है। बल्लेबाज सुरक्षित रहने के लिए गेंद को छोड़ सकता है, रक्षात्मक शॉट खेल सकता है या बिना दौड़े डॉट गेंद स्वीकार कर सकता है। रन तभी जुड़ते हैं जब बल्लेबाज दौड़कर छोर बदलें, गेंद सीमा रेखा तक पहुँचे या अंपायर अतिरिक्त रन दे।
इस नियम का महत्व शुरुआती स्कोरकार्ड में तुरंत दिखाई देता है। यदि बल्लेबाज गेंद को छूकर दोनों छोर बदलते हैं, तो 1 रन मिलता है; अगली गेंद पर फिर से रन लेने की संभावना रहती है। गेंद जमीन छूकर सीमा रेखा पार करे तो 4 रन और बिना जमीन छुए सीमा पार करे तो 6 रन मिलते हैं। हालांकि 4 या 6 के लिए बल्लेबाज का दौड़ना आवश्यक नहीं होता। लेग-बाय, बाय, नो-बॉल और वाइड अतिरिक्त रन की श्रेणियाँ हैं, इसलिए स्कोरबोर्ड पर बल्लेबाज के रन और टीम के कुल रन अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, बल्लेबाज ने 40 रन बनाए, लेकिन टीम का स्कोर 47 हो सकता है क्योंकि 7 रन अतिरिक्त से आए। यही वह जगह है जहाँ नए दर्शक स्कोरर को दोष देते हैं; स्कोरर बेचारा अक्सर निर्दोष होता है।
नियमों को छोटे उदाहरणों के साथ दोहराने के लिए क्रिकेट स्कोरकार्ड पढ़ने की विधि उपयोग करें।
मिथक 2: क्या हर कैच अपने-आप आउट होता है?
हर कैच आउट नहीं होता; कैच तभी मान्य है जब बल्लेबाज के बल्ले या बल्ले को पकड़े हाथ से लगी गेंद जमीन छूने से पहले फील्डर के नियंत्रण में पकड़ी जाए। यदि गेंद पहले जमीन पर लगती है, फील्डर का नियंत्रण टूटता है या गेंद नो-बॉल हो, तो बल्लेबाज नॉट आउट रह सकता है।
एमसीसी के नियमों में कैच के लिए गेंद पर नियंत्रण और पकड़ की निरंतरता महत्वपूर्ण है। फील्डर सीमा रेखा के बाहर खड़ा होकर गेंद पकड़ नहीं सकता, लेकिन हवा में रहते हुए गेंद को अंदर धकेलने जैसी जटिल स्थितियाँ अलग निर्णय पैदा कर सकती हैं। विकेटकीपर का कैच भी इसी मूल सिद्धांत से चलता है। स्लिप में खड़े फील्डर द्वारा लिया गया किनारा, ऊँचा लॉफ्टेड शॉट और विकेटकीपर द्वारा पकड़ी गेंद सभी कैच हो सकते हैं, लेकिन अंपायर को यह देखना पड़ता है कि गेंद जमीन से पहले पकड़ी गई या नहीं। आईसीसी के अंतरराष्ट्रीय खेलने की शर्तों में तकनीकी समीक्षा प्रक्रियाएँ भी दी जाती हैं। खास जानकारी यह है कि डीआरएस कैच को “सही” नहीं बनाता; वह केवल उपलब्ध वीडियो और ध्वनि प्रमाण से मैदानी निर्णय की जाँच करता है।
कैच, रन आउट और स्टंपिंग को अलग-अलग समझना चाहें तो विकेट गिरने के सभी तरीके पढ़ें।

मिथक 3: क्या नो-बॉल पर बल्लेबाज हमेशा आउट नहीं हो सकता?
नो-बॉल पर बल्लेबाज सामान्यतः बोल्ड, कैच, स्टंपिंग या हिट विकेट से आउट नहीं हो सकता, लेकिन रन आउट, ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड और कुछ परिस्थितियों में टाइम्ड आउट जैसे तरीके लागू हो सकते हैं। इसलिए “नो-बॉल पर कभी आउट नहीं” कहना साफ तौर पर गलत है।
नो-बॉल कई कारणों से दी जा सकती है। तेज गेंदबाज का फ्रंट पैर क्रीज की आगे वाली रेखा से पूरी तरह आगे निकल जाए, गेंद कमर से ऊपर खतरनाक ऊँचाई पर फेंकी जाए या फील्डिंग प्रतिबंध टूटे, तो अंपायर नो-बॉल दे सकता है। सीमित ओवर क्रिकेट में नो-बॉल के बाद सामान्यतः अगली गेंद फ्री हिट होती है, लेकिन फ्री हिट पर बल्लेबाज को केवल उन्हीं तरीकों से आउट किया जा सकता है जो नो-बॉल के नियम के भीतर अनुमत हैं। वाइड गेंद पर भी बल्लेबाज को अतिरिक्त रन मिलता है और वह गेंद ओवर की वैध छह गेंदों में नहीं गिनी जाती। यह एक महत्वपूर्ण संचालन संबंधी तथ्य है: नो-बॉल और वाइड दोनों ओवर की गेंदों की गिनती प्रभावित कर सकते हैं, जबकि बाय और लेग-बाय वैध गेंद पर भी हो सकते हैं। 2026 में भी प्रतियोगिता के अनुसार फ्री हिट और तकनीकी समीक्षा की प्रक्रिया आईसीसी या संबंधित आयोजन के नियमों से जाँची जानी चाहिए।
मैच की परिस्थितियों और अंपायर संकेतों को विस्तार से समझने के लिए यह अगला संदर्भ देखें।
असल में क्या काम करता है: शुरुआती खिलाड़ी क्या याद रखें?
क्रिकेट के नियम सीखने में सबसे अच्छा तरीका है पहले गेंद की वैधता, फिर रन की श्रेणी और अंत में विकेट की स्थिति समझना। एक नए दर्शक को शुरुआत में केवल पाँच संकेत याद रखने चाहिए: ओवर में 6 वैध गेंदें, सीमा से 4 या 6 रन, नो-बॉल और वाइड पर अतिरिक्त रन, विकेट गिरने के अलग तरीके और लक्ष्य का पीछा करते समय आवश्यक रन।
मैच देखते समय इन बातों को क्रम से नोट करें:
- टॉस जीतने वाली टीम ने बल्लेबाजी चुनी या गेंदबाजी।
- पारी कितने ओवर की है और प्रत्येक गेंद के बाद कितनी गेंदें बाकी हैं।
- बल्लेबाज का व्यक्तिगत स्कोर और टीम का कुल स्कोर।
- विकेट किस कारण गिरा: कैच, बोल्ड, रन आउट या एलबीडब्ल्यू।
- जीत के लिए कितने रन चाहिए और कितने विकेट शेष हैं।
एक महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि 20 ओवर के मैच में “पाँच ओवर बाकी” का अर्थ 30 वैध गेंदें शेष होना है, न कि हमेशा पाँच मिनट। बारिश, चोट, डीआरएस समीक्षा और ओवरों के बीच समय से वास्तविक अवधि बदल सकती है। पावरप्ले में फील्डिंग प्रतिबंध होते हैं, लेकिन उनकी सटीक संख्या टी20, एकदिवसीय या प्रतियोगिता के नियमों पर निर्भर करती है। टी20 और एकदिवसीय क्रिकेट की तुलना इस अंतर को तालिका के साथ समझाता है।
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रन, विकेट और ओवर का त्वरित सार
- रन: बल्लेबाज दौड़कर, 4, 6 या अतिरिक्त से टीम का स्कोर बढ़ाते हैं।
- विकेट: बल्लेबाज के आउट होने को आम तौर पर विकेट कहा जाता है; सीमित ओवर पारी में 10 विकेट गिरने पर पारी समाप्त हो सकती है।
- ओवर: 6 वैध गेंदों का समूह एक ओवर होता है।
- लक्ष्य: पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम के स्कोर से एक रन अधिक बनाना।
- टाई: दोनों टीमों का स्कोर बराबर होने पर मैच का परिणाम प्रारूप के नियमों के अनुसार तय होता है।
असल में क्या काम करता है: बल्लेबाज और गेंदबाज कैसे सोचें?
बल्लेबाज को हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के बजाय गेंद की लाइन, लंबाई और फील्डिंग देखकर निर्णय लेना चाहिए। गेंदबाज का लक्ष्य केवल तेज गेंद फेंकना नहीं, बल्कि बल्लेबाज को गलती करने के लिए मजबूर करना है। शुरुआती दर्शक इस रणनीतिक अंतर को समझ लें तो स्कोरकार्ड अचानक किसी गुप्त सरकारी दस्तावेज जैसा नहीं लगेगा।
बल्लेबाजी में स्ट्राइक बदलना, साझेदारी बनाना और विकेट बचाना महत्वपूर्ण है। गेंदबाजी में लाइन-लेंथ, स्विंग, सीम, स्पिन और गति परिवर्तन उपयोगी हथियार हैं। टेस्ट क्रिकेट में धैर्य और सत्रों का महत्व अधिक होता है; एकदिवसीय क्रिकेट में पावरप्ले और रन गति निर्णायक बन सकते हैं; टी20 में 120 गेंदों के भीतर जोखिम और गति का संतुलन जरूरी है। फील्डिंग टीम का कप्तान स्लिप, गली, पॉइंट, कवर, मिड-ऑफ, मिड-ऑन, स्क्वायर लेग और फाइन लेग जैसी जगहों पर खिलाड़ी लगाता है। 2026 में भी मैदान का आकार, पिच की स्थिति और प्रतियोगिता की खेल परिस्थितियाँ रणनीति को बदल सकती हैं। इसलिए केवल बल्लेबाज का स्ट्राइक रेट देखकर फैसला करना अधूरा है; विकेट, गेंदों की संख्या और विपक्षी फील्ड भी देखिए।
बल्लेबाजी और गेंदबाजी रणनीति की विस्तृत मार्गदर्शिका से अगला स्तर समझा जा सकता है।
शुरुआती दर्शक के लिए तीन व्यावहारिक आदतें
- हर ओवर के बाद स्कोर, विकेट और आवश्यक रन लिखें।
- अंपायर के संकेतों पर ध्यान दें: हाथ फैलाना वाइड, हाथ ऊपर उठाना नो-बॉल और उंगली उठाना आउट दर्शाता है।
- रीप्ले देखकर निर्णय को तुरंत सही न मानें; अंतिम फैसला तीसरे अंपायर और मैच अधिकारी की प्रक्रिया से आता है।
स्कोरकार्ड और रणनीति को साथ पढ़ना चाहते हैं? इस संदर्भ से आगे बढ़ें।
क्या अनदेखा करना चाहिए: क्रिकेट के कौन-से भ्रम छोड़ें?
शुरुआती प्रशंसक अक्सर सोशल मीडिया की छोटी क्लिप, अधूरे कमेंट्री वाक्य और पुराने नियमों को एक साथ मिलाकर निष्कर्ष निकालते हैं। किसी खिलाड़ी का 100 रन बनाना यह नहीं बताता कि टीम ने मैच जीत लिया; लक्ष्य, पारी की स्थिति और विपक्षी स्कोर भी देखना पड़ता है। इसी तरह गेंदबाज के पाँच विकेट लेने से परिणाम तय नहीं होता, क्योंकि दूसरी टीम की बल्लेबाजी अभी बाकी हो सकती है।
इन भ्रमों को छोड़ना विशेष रूप से उपयोगी है:
- “सिर्फ बल्ले से छूने पर रन मिलता है।” बाय और लेग-बाय में गेंद बल्ले से न लगने पर भी टीम को रन मिल सकते हैं।
- “एलबीडब्ल्यू में गेंद हमेशा स्टंप पर लगनी चाहिए।” एलबीडब्ल्यू में गेंद का पैड से लगना, पिचिंग स्थान, प्रभाव और स्टंप की दिशा देखी जाती है।
- “डीआरएस हर गलती सुधार देता है।” समीक्षा की संख्या सीमित हो सकती है और निर्णय उपलब्ध तकनीकी प्रमाण पर निर्भर करता है।
- “टेस्ट क्रिकेट में टाई सामान्य है।” टेस्ट टाई अत्यंत दुर्लभ परिणाम है; ड्रॉ और टाई अलग परिणाम हैं।
- “ओवर की छठी गेंद हमेशा आखिरी होती है।” नो-बॉल या वाइड होने पर अतिरिक्त गेंदें फेंकी जाती हैं।
एमसीसी के नियमों की मूल भावना खेल की निष्पक्षता और आचरण पर भी जोर देती है। आईसीसी के आधिकारिक दस्तावेजों में खेल भावना को लेकर यह विचार बार-बार आता है: “क्रिकेट केवल नियमों से नहीं, खेल भावना से भी संचालित होता है।” इसे आधुनिक भाषा में कहें तो नियम की दरार ढूँढना और खेल की आत्मा समझना दो अलग प्रतिभाएँ हैं। क्रिकेट की भावना और आचरण को पढ़ने से विवादित अपीलों और समय बर्बाद करने वाले व्यवहार का संदर्भ साफ होता है।
अब अंतिम बार मूल नियमों का पुनरावलोकन कर लें, फिर मैच देखते समय भ्रम काफी घट जाएगा।
एक पारी का सरल क्रम
- टॉस के बाद कप्तान बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनता है।
- दो बल्लेबाज क्रीज पर आते हैं और गेंदबाज एक छोर से गेंदबाजी करता है।
- प्रत्येक वैध ओवर के बाद गेंदबाजी का छोर बदलता है।
- विकेट गिरने पर नया बल्लेबाज आता है, जब तक पारी समाप्त न हो।
- लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम लक्ष्य से एक रन अधिक बनाकर जीतती है।
- समय, ओवर या विकेट समाप्त होने पर परिणाम प्रारूप के अनुसार तय होता है।
निष्कर्ष: क्रिकेट के नियमों को जल्दी कैसे पक्का करें?
क्रिकेट के नियम शुरुआती लोगों के लिए कठिन नहीं हैं, यदि सीखने का क्रम सही रखा जाए। पहले वैध गेंद और ओवर समझें, फिर रन तथा अतिरिक्त रन अलग करें, उसके बाद कैच, बोल्ड, रन आउट, एलबीडब्ल्यू और स्टंपिंग जैसे विकेटों को पहचानें। अंत में टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 के बीच ओवर, पावरप्ले, समीक्षा और परिणाम के अंतर पर ध्यान दें। 1877, 1971, 2003 और 2008 जैसे ऐतिहासिक पड़ाव यह दिखाते हैं कि क्रिकेट स्थिर नियमों का नहीं, नियंत्रित बदलावों का खेल है। क्रिकेट गाइड पर स्कोरकार्ड, खिलाड़ी आंकड़े, आईपीएल कवरेज और बल्लेबाजी-गेंदबाजी रणनीति पढ़ते समय यही ढाँचा काम आएगा। अगली बार मैच शुरू हो तो केवल गेंद पर नजर न रखें; स्कोर, विकेट, ओवर और नियम-संकेत चारों को साथ पढ़ें। यही छोटा अनुशासन आपको उस दर्शक से अलग करेगा जो हर अपील पर पहले ही फैसला सुना देता है।
क्रिकेट की समझ को नियमित रूप से मजबूत करने के लिए आगे पढ़ना शुरू करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्रिकेट में एक ओवर में कितनी गेंदें होती हैं?
उत्तर: एक ओवर में 6 वैध गेंदें होती हैं। नो-बॉल और वाइड वैध गेंद नहीं गिनी जातीं, इसलिए ऐसे मामलों में ओवर पूरा करने के लिए अतिरिक्त गेंद फेंकी जाती है। बाय और लेग-बाय वैध गेंद पर भी मिल सकते हैं और वे ओवर की गिनती को सामान्यतः नहीं बदलते। स्कोरकार्ड में ओवर को अक्सर दशमलव जैसे 4.3 के रूप में दिखाया जाता है, जिसका अर्थ 4 ओवर और 3 वैध गेंद है, 4.3 पूरे ओवर नहीं।
प्रश्न: क्रिकेट में नो-बॉल और वाइड में क्या अंतर है?
उत्तर: नो-बॉल गेंदबाज या फील्डिंग की नियम-विरुद्ध स्थिति से जुड़ी होती है, जबकि वाइड गेंद बल्लेबाज की सामान्य पहुँच से बाहर फेंकी गई गेंद होती है। दोनों पर टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर की 6 वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती। सीमित ओवर क्रिकेट में नो-बॉल के बाद फ्री हिट मिल सकती है, लेकिन प्रतियोगिता की आधिकारिक शर्तें देखना आवश्यक है।
प्रश्न: क्रिकेट में एलबीडब्ल्यू कैसे दिया जाता है?
उत्तर: एलबीडब्ल्यू तब दिया जा सकता है जब गेंद बल्ले से पहले पैड या शरीर पर लगे और नियमों के अनुसार स्टंप पर लगने की संभावना हो। अंपायर गेंद के पिचिंग स्थान, पैड से टकराने का स्थान, गेंद की दिशा और बल्लेबाज के शॉट खेलने के प्रयास को देखता है। ऑफ स्टंप के बाहर पिच हुई गेंद पर कई स्थितियों में एलबीडब्ल्यू नहीं दिया जाता, इसलिए हर पैड टकराव आउट नहीं होता।
प्रश्न: डीआरएस क्या है और इसका उपयोग कैसे होता है?
उत्तर: डीआरएस यानी निर्णय समीक्षा प्रणाली मैदानी अंपायर के कुछ फैसलों की तकनीकी समीक्षा करने की प्रक्रिया है। कप्तान निर्धारित समय में समीक्षा माँग सकता है, जिसके बाद तीसरा अंपायर रीप्ले, गेंद की दिशा, अल्ट्राएज या अन्य उपलब्ध तकनीक देखता है। समीक्षाओं की संख्या प्रारूप और प्रतियोगिता पर निर्भर करती है; इसलिए डीआरएस को असीमित अपील का अधिकार समझना गलत है।
प्रश्न: क्रिकेट मैच जीतने के लिए कितने रन चाहिए?
उत्तर: लक्ष्य का पीछा करने वाली टीम को पहली टीम के स्कोर से 1 रन अधिक बनाना होता है। यदि पहली टीम ने 180 रन बनाए, तो दूसरी टीम को जीत के लिए 181 रन चाहिए। लक्ष्य पूरा होने से पहले सभी विकेट गिर जाएँ या निर्धारित ओवर समाप्त हो जाएँ, तो परिणाम रन के अंतर या विकेट के अंतर से तय हो सकता है। बराबर स्कोर होने पर सुपर ओवर या अन्य नियम प्रारूप के अनुसार लागू हो सकते हैं।
प्रश्न: टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट में क्या अंतर है?
उत्तर: टेस्ट क्रिकेट में सामान्यतः पाँच दिन और दो पारियों का अवसर होता है, एकदिवसीय क्रिकेट में प्रत्येक टीम को 50 ओवर और टी20 में 20 ओवर मिलते हैं। टेस्ट में ड्रॉ संभव है और धैर्य महत्वपूर्ण होता है, जबकि टी20 में कम गेंदों में रन गति और जोखिम अधिक निर्णायक होते हैं। पावरप्ले, फील्डिंग प्रतिबंध, समीक्षा और टाई तोड़ने की प्रक्रिया प्रतियोगिता के नियमों से बदल सकती है।
प्रश्न: क्रिकेट सीखने वाले शुरुआती व्यक्ति को सबसे पहले क्या करना चाहिए?
उत्तर: शुरुआती व्यक्ति को पहले ओवर, वैध गेंद, रन, विकेट और लक्ष्य का पीछा करने की मूल संरचना सीखनी चाहिए। एक मैच देखते समय हर ओवर के बाद स्कोर, विकेट और आवश्यक रन लिखना सबसे व्यावहारिक अभ्यास है। इसके बाद अंपायर संकेत, पावरप्ले, नो-बॉल, वाइड और डीआरएस समझें। खिलाड़ी आंकड़े पढ़ने से पहले स्कोरकार्ड पढ़ना सीखें; वरना संख्याएँ आपको ऐसे घूरेंगी जैसे आपने उनका पर्स चुरा लिया हो।